बेंजामिन फ्रेंकलिन की किताबों की दुकान थी. एक दिन उनकी दुकान पर एक ग्राहक आया. कुछ किताबें देखने के बाद उसने दुकान के एक कर्मचारी से पूछा – “इस किताब की कीमत क्या है?”
कर्मचारी ने कहा – “एक डॉलर”.
ग्राहक ने कहा – “यह तो ज्यादा है. कुछ कम नहीं हो सकता क्या?”
कर्मचारी ने स्पष्ट कहा – “नहीं”.
ग्राहक ने कहा – “क्या बेन फ्रेंकलिन यहाँ हैं? मैं उनसे मिलना चाहता हूँ”.
वे अभी आने वाले हैं” – कर्मचारी ने कहा.
फ्रेंकलिन के आने के बाद ग्राहक ने उनसे पूछा – “इस किताब की कम-से-कम कीमत क्या होगी?”
फ्रेंकलिन ने कहा – “सवा डॉलर”.
ग्राहक ने आश्चर्य से कहा – “लेकिन आपकी दुकान के कर्मचारी ने तो इसकी कीमत एक डॉलर बताई है!”
“उसने ठीक बताया है. चौथाई डॉलर मेरे समय की कीमत है”.
ग्राहक ने आग्रह किया – “ठीक है. अब आप इसकी सही कीमत बता दीजिये”.
“अब डेढ़ डॉलर. आप लेने में जितनी देर करते जायेंगे, समय का मूल्य भी इसमें जुड़ता जायेगा”.
ग्राहक के पास अब कोई रास्ता न था. एक डॉलर के बदले डेढ़ डॉलर देकर उसने वह किताब खरीद ली. किताब के साथ ही उसे समय का मूल्य भी ज्ञात हो गया.
समय के महत्त्व को जानने वाले यही बेंजामिन फ्रेंकलिन अमेरिका के महान वैज्ञानिक, राजनीतिज्ञ और चिन्तक बने.
चित्र साभार : विकिपीडिया
(A motivational / inspiring anecdote of Benjamin Franklin – value of time – in Hindi)





आभार, निशांत!