अब्राहम लिंकन की वकालत

वकालत से कमाई की दृष्टि से देखें तो lincolnअमेरिका के राष्ट्रपति बनने से पहले अब्राहम लिंकन ने बीस साल तक असफल वकालत की. लेकिन उनकी वकालत से उन्हें और उनके मुवक्किलों को जितना संतोष और मानसिक शांति मिली वह धन-दौलत बनाने के आगे कुछ भी नहीं है. उनके वकालत के दिनों के सैंकड़ों सच्चे किस्से उनकी ईमानदारी और सज्जनता की गवाही देते हैं.

लिंकन अपने उन मुवक्किलों से अधिक फीस नहीं लेते थे जो ‘उनकी ही तरह गरीब’ थे. एक बार उनके एक मुवक्किल ने उन्हें पच्चीस डॉलर भेजे तो लिंकन ने उसमें से दस डॉलर यह कहकर लौटा दिए कि पंद्रह डॉलर पर्याप्त थे. आमतौर पर वे अपने मुवक्किलों को अदालत के बाहर ही राजीनामा करके मामला निपटा लेने की सलाह देते थे ताकि दोनों पक्षों का धन मुकदमेबाजी में बर्बाद न हो जाये. इसके बदलें में उन्हें न के बराबर ही फीस मिलती था. एक शहीद सैनिक की विधवा को उसकी पेंशन के 400 डॉलर दिलाने के लिए एक पेंशन एजेंट 200 डॉलर फीस में मांग रहा था. लिंकन ने उस महिला के लिए न केवल मुफ्त में वकालत की बल्कि उसके होटल में रहने का खर्चा और घर वापसी की टिकट का इंतजाम भी किया.

लिंकन और उनके एक सहयोगी वकील ने एक बार किसी मानसिक रोगी महिला की जमीन पर कब्जा करने वाले एक धूर्त आदमी को अदालत से सजा दिलवाई. मामला अदालत में केवल पंद्रह मिनट ही चला. सहयोगी वकील ने जीतने के बाद फीस में बँटवारा करने की बात की लेकिन लिंकन ने उसे डपट दिया. सहयोगी वकील ने कहा कि उस महिला के भाई ने पूरी फीस चुका दी थी और सभी अदालत के निर्णय से प्रसन्न थे परन्तु लिंकन ने कहा – “लेकिन मैं खुश नहीं हूँ! वह पैसा एक बेचारी रोगी महिला का है और मैं ऐसा पैसा लेने के बजाय भूखे मरना पसंद करूँगा. तुम मेरी फीस की रकम उसे वापस कर दो.”

आज के हिसाब से सोचें तो लिंकन बेवकूफ थे. उनके पास कभी भी कुछ बहुतायत में नहीं रहा और इसमें उन्हीं का दोष था. लेकिन वह हम सबमें सबसे अच्छे मनुष्य थे, क्या कोई इस बात से इनकार कर सकता है?

लिंकन कभी भी धर्म के बारे में चर्चा नहीं करते थे और किसी चर्च से सम्बद्ध नहीं थे. एक बार उनके किसी मित्र ने उनसे उनके धार्मिक विचार के बारे में पूछा. लिंकन ने कहा – “बहुत पहले मैं इंडियाना में एक बूढ़े आदमी से मिला जो यह कहता था ‘जब मैं कुछ अच्छा करता हूँ तो अच्छा अनुभव करता हूँ, और जब बुरा करता हूँ तो बुरा अनुभव करता हूँ’. यही मेरा धर्म है’.

चित्र साभार : फ्लिकर

(A motivational / inspiring anecdote of Abraham Lincoln in Hindi)

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12 Comments

Filed under राजनयिक-नेता

12 Responses to अब्राहम लिंकन की वकालत

  1. आप ने बहुत अच्छा लिखा, ओर सच मै आज भी जरुर ऎसे वेबकुफ़ लोग मिलते होगे, लेकिन एक अरबपति से भी ज्यादा अमीर ओर सम्मान योग्य, काश हम सब ऎसे ही वेबकुफ़ बन जाये.

  2. लिंकन का पूरा जीवन लोगों के लिए एक मिसाल है। जानकारी के लिए आभार।

    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

  3. प्रेरक प्रसंग.

    आभार.

  4. Shailendra

    Bahut acha

  5. Murari Parajuli -Nepal

    Very nice. it is to be followed by every one.

  6. ye unki mahanta ki pahchan thi tbhi wo aaj markar bhi janda he !

  7. aayush

    Abraham Lincon is great!! Koi bhee insan kisi bhee caste, religion ka ho usase fark naheen padataa lekin vyktivya aisa hona chahiye. Thnx for d post..

  8. yogi tiwari

    mahan log sabse alag hote hai

  9. yogi tiwari

    mahan log sabase alag hote hai

  10. vijay mandloi

    sorry muzhe jayada english nahi ati hain.
    Sabse pahle me appka khule dil se abhar aur sukriyada
    vykta karta hun ki app ne india ke liye our yahan ke logo
    ke liye hindi me ye sabhi satik aur itini achi jankariyan jutai hai..
    ham achhe logo k prasang padke kuch sikshka to le sakengi……….
    Thanks to u..

  11. anuj

    ma english ma bat anhi kar sakta kyonki muja ati nahi. mhan bna ka liya dil khula hona chyia or dil kula hona ki ka vichar kula hona chyia.abriyam linkan ka vichar kula tha ,ha, rhanga or hum una bdana ki koshish karnga. we must to follow abriyam linkan.

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