मुल्ला नसरुद्दीन के चंद छोटे किस्से

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एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन अपने गधे पर बैठकर किसी दूसरे शहर से अपने गाँव आया. लोगों ने उसे रोककर कहा – “मुल्ला, तुम अपने गधे पर सामने पीठ करके क्यों बैठे हो?” मुल्ला ने कहा – “मैं यह जानता हूँ कि मैं कहाँ जा रहा हूँ लेकिन मैं यह देखना चाहता हूँ कि मैं कहाँ से आ रहा हूँ.

* * * * *

उसी शाम मुल्ला रसोई में कुछ बना रहा था. वह अपने पड़ोसी के पास गया और उससे एक बरतन माँगा और वादा किया कि अगली सुबह उसे वह बरतन लौटा देगा.

अगले दिन मुल्ला पड़ोसी के घर बरतन लौटाने के लिए गया. पडोसी ने मुल्ला से अपना बरतन ले लिया और देखा कि उसके बरतन के भीतर वैसा ही एक छोटा बरतन रखा हुआ था. पड़ोसी ने मुल्ला से पूछा – “मुल्ला! यह छोटा बरतन किसलिए?” मुल्ला ने कहा – “तुम्हारे बरतन ने रात को इस बच्चे बरतन को जन्म दिया इसलिए मैं तुम्हें दोनों वापस कर रहा हूँ.”

पड़ोसी को यह सुनकर बहुत ख़ुशी हुई और उसने वे दोनों बरतन मुल्ला से ले लिए. अगले ही दिन मुल्ला दोबारा पड़ोसी के घर गया और उससे पहलेवाले बरतन से भी बड़ा बरतन माँगा. पडोसी ने ख़ुशी-ख़ुशी उसे बड़ा बरतन दे दिया और अगले दिन का इंतज़ार करने लगा.

एक हफ्ता गुज़र गया लेकिन मुल्ला बरतन वापस करने नहीं आया. मुल्ला और पडोसी बाज़ार में खरीदारी करते टकरा गए. पडोसी ने मुल्ला से पूछा – “मुल्ला! मेरा बरतन कहाँ है?” मुल्ला ने कहा – “वो तो मर गया!” पडोसी ने हैरत से पूछा – “ऐसा कैसे हो सकता है? बरतन भी कभी मरते हैं!” मुल्ला बोला – “क्यों भाई, अगर बरतन जन्म दे सकते हैं तो मर क्यों नहीं सकते?”

* * * * *

एक दिन मुल्ला और उसका एक दोस्त कहवाघर में बैठे चाय पी रहे थे और दुनिया और इश्क के बारे में बातें कर रहे थे. दोस्त ने मुल्ला से पूछा – “मुल्ला! तुम्हारी शादी कैसे हुई?”

मुल्ला ने कहा – “यार, मैं तुमसे झूठ नहीं बोलूँगा. मैंने अपनी जवानी सबसे अच्छी औरत की खोज में बिता दी. काहिरा में मैं एक खूबसूरत, और अक्लमंद औरत से मिला जिसकी आँखें जैतून की तरह गहरी थीं लेकिन वह नेकदिल नहीं थी. फिर बग़दाद में भी मैं एक औरत से मिला जो बहुत खुशदिल और सलीकेदार थी लेकिन हम दोनों के शौक बहुत जुदा थे. एक के बाद दूसरी, ऐसी कई औरतों से मैं मिला लेकिन हर किसी में कोई न कोई कमी पाता था. और फिर एक दिन मुझे वह मिली जिसकी मुझे तलाश थी. वह सुन्दर थी, अक्लमंद थी, नेकदिल थी और सलीकेदार भी थी. हम दोनों में बहुत कुछ मिलता था. मैं तो कहूँगा कि वह पूरी कायनात में मेरे लिए ही बनी थी…” दोस्त ने मुल्ला को टोकते हुए कहा – “अच्छा! फिर क्या हुआ!? तुमने उससे शादी कर ली!”

मुल्ला ने ख्यालों में खोए हुए चाय की एक चुस्की ली और कहा – “नहीं दोस्त! वो तो दुनिया के सबसे अच्छे आदमी की तलाश में थी.”

* * * * *

एक दिन मुल्ला बाज़ार गया और उसने एक इश्तेहार लगाया जिसपर लिखा था : “जिसने भी मेरा गधा चुराया है वो मुझे उसे लौटा दे. मैं उसे वह गधा ईनाम में दे दूंगा”.

“नसरुद्दीन!” – लोगों ने इश्तेहार पढ़कर कहा – “ऐसी बात का क्या मतलब है!? क्या तुम्हारा दिमाग फिर गया है?”

“दुनिया में दो ही तरह के तोहफे सबसे अच्छे होते हैं” – मुल्ला ने कहा – “पहला तो है अपनी खोई हुई सबसे प्यारी चीज़ को वापस पा लेना, और दूसरा है अपनी सबसे प्यारी चीज़ को ही किसी को दे देना.”

* * * * *

मुल्ला के ऐसे ही और कई छोटे किस्सों को पढ़ने के लिए थोड़ा सा इंतज़ार करें. इंतज़ार का फल बहुत मीठा होता है.

(ऊपर दिया गया चित्र flickr से लिया गया है)

5 Comments

Filed under Mulla Nasruddin

5 Responses to मुल्ला नसरुद्दीन के चंद छोटे किस्से

  1. मस्त किस्से..मुल्ला नसरुद्दीन के.

  2. बहुत प्यारे किस्से.. मजा आ गया..

  3. बचपन में बहुत सुने हैं मुल्ला के किस्से और टीवी पर देखें भी हैं पर फ़िर भी पढ़ने में आज भी उतने ही रोचक ..

  4. geetashree

    शानदार कहानियां, आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. हिंदी की दुनिया को संपन्न कर रहे हैं. लगता है कहानियों को पढती जाउं… कोई बात नहीं किसी अच्छी किताब की तरह अपने खालीपन को भरा जा सकता है इन्हें पढते हुए.

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