ज़िन्दगी कैसे जियें

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“ज़िन्दगी लम्बी नहीं, गहरी होनी चाहिए” – रौल्फ वाल्डो इमर्सन

क्योंकि ज़िन्दगी जीने में और जीवित रहने में बहुत बड़ा अंतर है

* जब तक जियें तब तक सीखते रहें - हमेशा नया कुछ सीखने और पढने में हम जितना समय और ऊर्जा लगाते हैं वह हमारे जीवन को रूपांतरित करता रहता है. हम सभी हमारे ज्ञान का ही प्रतिबिम्ब हैं. जितना अधिक हम ज़िन्दगी से सीखते हैं उतना अधिक हम इसपर नियंत्रण रख पाते हैं.

* अपने शरीर और स्वास्थ्य की रक्षा करें - हमारा शरीर हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण यन्त्र या औजार है. हम जो कुछ भी सही-गलत करते हैं उसका हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है. हमें अपने शरीर को पोषण, व्यायाम, और आराम देना चाहिए और स्वास्थ्य की रक्षा करनी चाहिए.

* प्रियजनों के साथ अधिकाधिक समय व्यतीत करना - हम सभी भावुक प्राणी हैं. हमें सदैव अपने परिजनों और मित्रों के सहारे की ज़रुरत होती है. जितना अधिक हम उनका ध्यान रखते हैं उतना ही अधिक वे हमारी परवाह करते हैं.

* अपने विश्वासों के प्रति समर्पण रखें - कुछ लोग अपने सामजिक परिवेश में सक्रीय होते हैं, कुछ लोग धार्मिक आस्था से सम्बद्ध हो जाते हैं, कोई व्यक्ति लोगों का जीवन सुधरने की दिशा में प्रयास करता है, अधिकांश लोग अपने काम और नौकरी के प्रति समर्पण भाव रखते हैं. प्रत्येक स्थिति में उन्हें एक समान मनोवैज्ञानिक परिणाम मिलता है. वे स्वयं को ऐसी गतिविधि में लिप्त रखते हैं जिससे उन्हें मानसिक शांति और संतुष्टि मिलती है. इससे उनके जीवन को मनोवांछित अर्थ मिलता है.

* जो भी करें सर्वश्रेष्ठ करें - यदि आप कोई काम बेहतर तरीके से नहीं कर सकते तो उसे करने में कोई तुक नहीं है. अपने काम और अपनी अन्य गतिविधियों जैसे रूचियों आदि में सबसे बेहतर साबित होकर निखरें. लोगों में अपनी धाक जमायें कि आप जो कुछ भी करते हैं वह सदैव सर्वश्रेष्ठ ही होता है.

* अपने पैर चादर के भीतर ही रखें - अच्छी ज़िन्दगी जियें लेकिन किसी तरह का अपव्यय न करें. दूसरों को दिखाने के लिए पैसा न उडाएं. याद रखें कि वास्तविक संपत्ति दुनियावी चीज़ों में निहित नहीं होती.  अपने धन का नियोजन करें, धन को अपना नियोजन न करने दें. अपने से कम आर्थिक हैसियत रखनेवाले को देखकर जियें.

* संतोषी जीवन जियें - स्वतंत्रता सबसे बड़ा वरदान है. संतोष सबसे बड़ी स्वतंत्रता है.

* अपना प्रेमाश्रय बनायें - घर वहीँ है, ह्रदय है जहाँ. आपका घर कैसा भी हो, उसे प्यार के पलस्तर से बांधे रखें. याद रखें, घर और परिवार एक दुसरे के पूरक हैं.

* स्वयं और दूसरों के प्रति ईमानदार रहें - ईमानदारी भरा जीवन मानसिक शांति की गारंटी है और मानसिक शांति अनमोल होती है.

* दूसरों का आदर करें - बड़ों का आदर करें, छोटों का भी सम्मान करें. ऐसी कोई श्रेणी नहीं होती जो किसी मानव को दूसरे मानव से पृथक कर सकती हो. सभी को एक समान इज्ज़त बख्शें. जितना धैर्य आप अपने नवजात शिशु के प्रति दिखाते हैं उतने ही धैर्य से अपने वृद्ध पिता से भी व्यवहार करें.

* नया करते रहें - अपने प्रियजनों के साथ आप भांति-भांति प्रकार के अनुभव साझा करें. आपकी जीवन गाथा विस्तृत अनुभवों की लड़ी ही तो है! जितने अच्छे अनुभव आप उठाएंगे, आपका जीवन उतना ही अधिक रोचक बनेगा.

* अपने कर्मों की जिम्मेदारी से न बचें - आप कुछ भी करें, भले ही वह सही हो या गलत, उसकी जिम्मेदारी उठाने से न कतराएँ. यदि आप स्वयं जिम्मेदारी ले लेंगे तो आपको जिम्मेदार नहीं ठहराया जायेगा.

* अपने वायदों को हद से भी ज्यादा पूरा करें - बहुत सारे लोग दूसरों से बिना सोचविचार किये ही वायदे कर बैठते हैं और उन्हें निभा नहीं पाते. वे वादा करते हैं काम पूरा करने का लेकिन काम शुरू भी नहीं करते. यदि आप लोगों की दृष्टि में ऊंचा उठना चाहते हैं तो इसका ठीक उल्टा करें. अपनी योग्यताओं कों यदि आप कम प्रदर्शित करेंगे तो आप सदैव लोगों की दृष्टि में वांछित से अधिक उपयोगी साबित होंगे. लोगों में आपकी कर्तव्यनिष्ठ और कार्यकुशल व्यक्ति की छवि बनेगी.

* सुनें ज्यादा, बोलें कम - ज्यादा सुनने और कम बोलने से आप ज्यादा सीखते हैं और आपका ध्यान विषय से कम भटकता है.

* अपना ध्यान कम विषयों पर केन्द्रित करें - कराटे के बारे में सोचें, ब्लैक बैल्ट कम सुन्दर दिखती है बनिस्पत ब्राउन बैल्ट के. लेकिन क्या एक ब्राउन बैल्ट किसी रेड बैल्ट से अधिक सुन्दर दिखती है? बहुत से लोग ऐसा नहीं सोचेंगे. हमारा समाज प्रबुद्ध और महत्वपूर्ण लोगों कों बहुत ऊंची पदवी पर बिठाता है. परिश्रम बहुत मायने रखता है लेकिन इसे केन्द्रित होना चाहिए. अपना ध्यान अनेक विषयों में लगाकर आप किसी एक में पारंगत नहीं हो पायेंगे. एक को साधने का विचार ही सर्वोत्तम है.

* उपलब्ध साधनों का भरपूर दोहन करें - साधारण व्यक्ति जब किसी बहुत प्रसन्नचित्त अपाहिज व्यक्ति कों देखते हैं तो उन्हें इसपर आर्श्चय होता है. ऐसी शारीरिक असमर्थता की दशा में भी कोई इतना खुश कैसे रह सकता है!? इसका उत्तर इसमें निहित है कि वे ऐसे व्यक्ति अपने पास उपलब्ध सीमित शक्ति और क्षमता का परिपूर्ण दोहन करने में सक्षम हो जाते हैं. अश्वेत गायक स्टीवी वंडर देख नहीं पाते लेकिन अपनी सुनने और गाने की प्रतिभा को विकसित करने के परिणामस्वरूप उन्होंने 25 ग्रैमी पुरस्कार जीत लिए हैं.

* छोटी-छोटी खुशियों से ज़िन्दगी बनती है - मैं यह हमेशा ही कहता हूँ कि जीवन में जो कुछ भी सबसे अच्छा है वह हमें मुफ्त में ही मिल जाता है. वह सब हमारे सामने नन्हे-नन्हे पलों में मामूली खुशियों के रूप में जाने-अनजाने आता रहता है. प्रकृति स्वयं उन क्षणों कों हमारी गोदी में डालती रहती है. अपने प्रियजन के साथ हाथों में हाथ डालकर बैठना और सरोवर में डूब रहे सूर्य के अप्रतिम सौन्दर्य कों देखने में मिलनेवाले आनंद का मुकाबला और कोई बात कर सकती है क्या? ऐसे ही अनेक क्षण देखते-देखते रोज़ आँखों से ओझल हो जाते हैं और हम व्यर्थ की बातों में खुशियों की तलाश करते रहते हैं.

* लक्ष्य पर निगाह लगायें रखें - लक्ष्य की दिशा में न चलने से और भटकाव में पड़ जाने से कब किसका भला हुआ है! आप आज जहाँ हैं और कल आपको जहाँ पहुंचना है इसपर सतत मनन करते रहने से लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है और नई दिशाएं सूझने लगती हैं. इससे आपमें स्वयं कों सम्भालकर पुनः शक्ति जुटाकर नए हौसले के साथ चल देने की प्रेरणा मिलती है.

* अवसरों कों न चूकें - कभी-कभी अवसर अत्प्रश्याशित समय पर हमारा द्वार खटखटाता है. ऐसे में उसे पहचानकर स्वयं कों उसके लिए परिवर्तित कर लेना ही श्रेयस्कर होता है. सभी बदलाव बुरे या भले के लिए ही नहीं होते.

* इसी क्षण में जीना सीखें - जो पल इस समय आपके हाथों में है वही पल आपके पास है. इसी पल में ज़िन्दगी है. इस पल कों जी लें. यह दोबारा लौटकर नहीं आएगा.

(यह पोस्ट यहाँ से साभार लेकर अनूदित/संपादित की गई है)

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21 Comments

Filed under प्रेरक लेख

21 Responses to ज़िन्दगी कैसे जियें

  1. अति उत्तम विचार.

  2. yoursanurag

    बहुत अच्छा लिख रहें है, बधाई..

  3. बहुत अच्छी सीख. आपका आभार.

  4. prabhat

    ati sundar ji

  5. SUDIP

    sundar aur margdarsak………

  6. Aap ka artical is very good & Jindigi me utarne kabil hi
    ज़िन्दगी लम्बी नहीं, गहरी होनी चाहिए”

  7. Ramkumar pal

    bahut achcha likha hai

  8. prabhat

    wa kiya bat hai

  9. Mahesh Bhawarkar

    jindgi bhahut hi khubsurat (GOD) ne banaee hay. Hum apni shoc se achi or buri nam diya hay.

  10. birendra rawat

    Life main sellf ko grve karna padhta hai. 80 yeras old man give us life thoughts. Every person don’t time west. time is important for human. apportunity knocks the door at once.

  11. prahlad kashyap

    very2 good thought

  12. Abhimanyu

    dear readers,
    I want to say that you should also take action upon this thought.because lafcadio hearn says that we should not read for merely amusement and if the good idea is not acted upon it will be forget soon. so just do it NOW.

  13. jitendra solanki

    really the best collexction of ideas at one place…

  14. bahut acha hai zindagi jine me mazaa aa raha hai..

  15. jindagi jindadili ka naam hai jo dar gaya so mar gaya.

  16. jindagi ek phool hai,payaar uski khousbu,

  17. shivraj singh

    aapne to aaj mujhe jeena sikha diya aapka bahut bshut dhanybad

  18. Tejas

    bahut badhiya or acha likh raho ho

  19. shakuntla

    lekh achha hai .hindi ki kuchh web ke naam aur batayen

  20. JAY PRAKASH

    Aapki Lekho se hamai or hamare mitro ko ak sahi jivan jine ka rasta mil gya hai.

  21. achha pryas he umid krta hu sbhi labh uthayege

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