बंधी मुठ्ठी – खुली मुठ्ठी

2836991287_b4a4ee6c42ज़ेन गुरु मोकुसेन हिकी के एक शिष्य ने एक दिन उनसे कहा की वह अपनी पत्नी के कंजूसी भरे स्वभाव के कारण बहुत परेशान था।

मोकुसेन उस शिष्य के घर गए और उसकी पत्नी के चहरे के सामने अपनी बंधी मुठ्ठी घुमाई।

“इसका क्या मतलब है? – शिष्य की पत्नी ने आश्चर्य से पूछा।

“मान लो मेरी मुठ्ठी हमेशा इसी तरह कसी रहे तो तुम इसे क्या कहोगी?” – मोकुसेन ने पूछा।

“मुझे लगेगा जैसे इसे लकवा मार गया है” – वह बोली।

मोकुसेन ने अपनी मुठ्ठी खोलकर अपनी हथेली पूरी तरह कसकर फैला दी और बोले – “और अगर यह हथेली हमेशा इसी तरह फैली रहे तो! इसे क्या कहोगी?”

“यह भी एक तरह का लकवा ही है!” – वह बोली।

“अगर तुम इतना समझ सकती हो तो तुम अच्छी पत्नी हो” – यह कहकर मोकुसेन वहां से चले गए।

वह महिला वाकई इतनी समझदार तो थी। उसने अपने पति को फ़िर कभी शिकायत का मौका नहीं दिया।

9 Comments

Filed under Zen Stories

9 Responses to बंधी मुठ्ठी – खुली मुठ्ठी

  1. संगीता पुरी

    अच्‍छी शिक्षा देती कहानी ।

  2. आलोक सिंह

    प्रेरणादायक कहानी , न ही मुट्ठी बंद रखो और नहीं खुली , सोच विचार कर खर्च करो .

  3. सुशील कुमार छौक्कर

    वाह क्या बात है।

  4. pravin

    jabab nahi is kahani ka… prernadayak kahani

  5. surinder

    achi shiksha deti hai yeh choti si kahani

  6. neeru

    sahi baat kahi hai sahi tareke ke saath

  7. prabhat

    achi shiksha chote si kahani mai .

  8. aapka ye blog dekh kar hardik prasannata hui,,,,

    aapke dwara sangrahit kathayen atyant manohaari he, dhanyavaad

  9. eska shiksha koye bol satkha he???????? mujhe jaldi chahiye me aapk aabari hoge!!!!!

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