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राबिया : Rabia

cornelia kopp photo

आज मैं आपको इस्लाम में सूफी परम्परा की एक अत्यन्त महान महिला संत राबिया के बारे में बताऊंगा। राबिया के विषय में बस इतना ही ज्ञात है कि उनका जन्म अरब में आठवीं शताब्दी में हुआ था। वे साधुओं की भांति समाज से दूर कुटिया बनाकर ईश्वर की आराधना में ही लीन रहती थीं।

उनके बारे में कई कहानियाँ प्रचलित हैं। उनकी कुटिया में केवल एक चटाई, घड़ा, मोमबत्ती, कुरान और ठण्ड में ओढ़ने के लिए कम्बल रहता था। एक रात एक चोर उनकी कुटिया से कम्बल चुराकर ले जाने लगा। कुटिया से बाहर जाते समय उसने यह पाया कि दरवाज़ा बंद था और खुल नहीं पा रहा था। उसने कम्बल नीचे जमीन पर रख दिया। कम्बल नीचे रखते ही दरवाज़ा खुल गया। उसने कम्बल उठा लिया पर दरवाजा फ़िर से बंद हो गया। उसे कुटिया के कोने से किसी की आवाज़ सुनाई दी:

“उसने तो सालों पहले ही मेरी शरण ले ली है। शैतान भी यहाँ आने से डरता है तो तुम जैसा चोर कैसे उसका कम्बल चुरा सकता है? बाहर चले जाओ! जब ईश्वर का मित्र सो रहा होता है तब स्वयं ईश्वर उसकी रक्षा के लिए उसके पास बैठा जाग रहा होता है।”

* * * * *

मलिक नामक एक विद्वान एक दिन राबिया से मिलने गया। उसने औरों को राबिया के बारे में यह बताया – “उसके पास एक घड़ा है जो वह पीने का पानी रखने और धोने के लिए इस्तेमाल करती है। वह जमीन पर चटाई बिछाकर सोती है और तकिये की जगह पर वह सर के नीचे ईंट लगा लेती है। उसकी गरीबी देखकर मैं रो पड़ा। मैंने उससे कहा कि मेरे कई धनी मित्र हैं जो उसकी सहायता करने के लिए तैयार हैं।”

“लेकिन राबिया ने मेरी बात सुनकर कहा – ‘”नहीं मलिक, क्या मुझे जीवन और भोजन देनेवाला वही नहीं है जो उन्हें भी जीवन और भोजन देता है? क्या तुम्हें यह लगता है कि वह गरीबों की गरीबी का ख्याल नहीं रखता और अमीरों की मदद करता है?”‘

मलिक – “मैंने कहा ”नहीं राबिया”।

राबिया बोली – “तुम ठीक कहते हो। जब उसे मेरी हालत का इल्म है तो मैं उससे किस बात का गिला-शिकवा करूँ? अगर वह मुझे ऐसे ही पसंद करता है तो मैं उसकी मर्जी से ही रहूंगी।”

* * * * *

एक दिन लोगों ने राबिया को दौड़ते हुए देखा। उसके एक हाथ में जलती हुई टहनी थी और दूसरे हाथ में पानी का बर्तन। किसी ने पूछा – “ओ राबिया, तुम कहाँ जा रही हो और क्या कर रही हो?”। राबिया ने कहा – “मैं स्वर्ग में आग लगाने और नर्क की लपटें बुझाने जा रही हूँ। ऐसा होने पर ही तुम यह जान पाओगे कि ये दोनों भ्रम हैं और तब तुम अपना मकसद हासिल कर पाओगे। जब तुम कोई परम सुख की कामना नहीं करोगे और तुम्हारे दिल में कोई उम्मीद और डर न रह जाएगा तभी तुम ईश्वर को पा सकोगे। आज मुझे कोई भी आदमी ऐसा नहीं दिखता जो स्वर्ग की लालसा और नर्क के भय के बिना ईश्वर की आराधना केवल ईश्वर को पाने के लिए करता हो।”

(~_~)

Rabia el Adawiya is one of the rarest women in the whole human history. There are only a few names that can be compared to Rabia, but still she remains rare, even among these few names — Meera, Theresa, Laila. These are the few names. But Rabia still remains rare. She is a KOHINOOR, the most precious woman ever born. Her insight is immense.
Hasan is also a famous mystic but on a very much lower scale. And there are many stories about Hasan and Rabia.
One day Rabia is sitting inside her hut. It is early morning, and Hasan comes to see her. And the sun is rising and the birds are singing and the trees are dancing. It is a really beautiful morning.
And he calls forth from the outside, ‘Rabia, what are you doing inside? Come out! God has given birth to such a beautiful morning. What are you doing inside?’
And Rabia laughs and she says, ‘Hasan, outside is only God’s creation, inside is God himself. Why don’t you come in? Yes, the morning is beautiful, but it is nothing compared with the Creator who creates all the mornings. Yes, those birds are singing beautifully, but they are nothing compared with the song of God. That happens only when you are within. Why don’t you come in? Are you not yet finished with the without, with the outside? When will you be able to come in?’
Such stories, small, but of tremendous significance….
One evening people saw her searching for something on the street in front of her hut. They gathered together — the poor old woman was searching for something. They asked, ‘What is the matter? What are you searching for?’ And she said, ‘I have lost my needle.’ So they also started helping.
Then somebody asked, ‘Rabia, the street is big and night is just descending and soon there will be no light and a needle is such a small thing — unless you tell us exactly where it has fallen it will be difficult to find.’
Rabia said, ‘Don’t ask that. Don’t bring that question up at all. If you want to help me, help, otherwise don’t help, but don’t bring up that question.’
They all stopped — all those who were searching — and they said. ‘What is the matter? Why can’t we ask this? If you don’t say where it has fallen, how can we be of any help to you?’
She said, ‘The needle has fallen inside my house.’
They said, ‘Then have you gone mad? If the needle has fallen inside the house why are you searching here?’
And she said, ‘Because the light is here. Inside the house there is no light.’
Somebody said, ‘Even if the light is here, how can we find the needle if it has not been lost here? The right way would be to bring light inside the house so you can find the needle.’
And Rabia laughed, ‘You are such clever people about small things. When are you going to use your intelligence for your inner life? I have seen you all searching outside and I know perfectly well, I know from my own experience that that which you are searching for is lost within. The bliss that you are searching for, you have lost within — and you are searching outside. And your logic is that because your eyes can see easily outside, and your hands can grope easily outside, because the light is outside, that’s why you are searching outside.
‘If you are really intelligent,’ Rabia said, ‘then use your intelligence. why are you searching for bliss in the outside world? Have you lost it there?’
They stood dumbfounded and Rabia disappeared into her house.
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9 Comments Post a comment
  1. MANVINDER BHIMBER #

    rabiya yaani …..ishwar ke bahut najdeek…bahut pyaari katha hai….shukriya

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    March 18, 2009
    • sw prem utsav #

      man ko bhane walli
      essi katha mere sad guru osho bhi bahut bar kahate hain dhanyabad apka jo ………..

      Like

      July 1, 2009
  2. Mired Mirage #

    सुन्दर ! प्रेरणादायक कहानियाँ।
    घुघूती बासूती

    Like

    March 18, 2009
  3. लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` #

    बहुत सुँदर कथाएँ हैँ राबिया की भक्ति की कथा सँत तुलसी दास जी से मिलती है
    श्री राम व लक्ष्मण जी भी बाबाजी की कुटीया का पेहरा देते थे ऐसा प्रसँग भी
    पढा है ..

    - लावण्या

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    March 18, 2009
  4. सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi #

    बहुत साल पहले मुस्लिम रहस्‍यवाद की जननी राबिया पर एक किताब पढ़ी थी। निशांतजी राबिया के बारे में जितनी कहानियां सामने आए उतनी कम है। तीस से अधिक तो मैंने पढ़ी थी। उस छोटी सी पुस्‍तक में। इस्‍लाम में धर्म को दार्शनिक पृष्‍ठभूमि देने वाले दार्शनिकों में से एक है राबिया।

    हिन्‍दू मान्‍यता में जो दर्जा शंकराचार्य के पास है तकरीबन वही दर्जा मुस्लिम संप्रदाय में राबिया का होना चाहिए। दोनों केवल उस सत्‍ता को ही सत्‍य मानते हैं बाकी सब झूठ।

    अच्‍छी कथाएं। राबिया का तो और भी संकलन मिल सकता है। मुझे दोबारा वह किताब मिली तो आपको कुछ कथाएं भेजने का प्रयास करूंगा। आपके ब्‍लॉग के लिए।

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    March 19, 2009
  5. आलोक सिंह #

    बहुत ही प्रेरणा दायक प्रसंग ,
    अगर वह मुझे ऐसे ही पसंद करता है तो मैं उसकी मर्जी से ही रहूंगी। काश ऐसी सोच हम सब की हो जाये तो कही कुछ गलत नहीं होगा .

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    March 19, 2009
  6. Reema #

    तीसरी कहानी तो बहुत ही अच्छी है…केवल इच्छापूर्ति या डर के कारण ही सब धर्मों के लोग अपने-अपने भगवान को पूजते हैं.

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    March 19, 2009
  7. रंजना [रंजू भाटिया] #

    राबिया के बारे में बहुत कुछ पढ़ा है ..यहाँ उनके बारे में और अधिक जान कर अच्छा लगा शुक्रिया

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    March 19, 2009
  8. deepak vaghani #

    aap ka ye koshish lajwab he.. aaj logo ko achha lage wohi sab likhate he… apne logo ke liye kya achha he ye likha hy…
    Great

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    April 17, 2010

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