लियो बबौटा ग्वाम में रहते हैं और एक बहुत उपयोगी ब्लॉग ज़ेन हैबिट्स के ब्लौगर हैं। यह उनकी एक अच्छी और उपयोगी पोस्ट का अनुवाद है:
अनुवादक : मेरे एक मित्र ने मुझसे कहा कि लियो की बताई हुई बातों में कुछ नया नहीं है और हमारे यहाँ के कई लोग जैसे शिव खेडा आदि ने भी ऐसी ही प्रेरक और ज्ञानवर्धक बातें लिखी-कही है। मैं अपने मित्र से 100% सहमत हूँ लेकिन लियो जो कुछ भी कहते या लिखते हैं वह उनके अपने अनुभव पर जांचा-परखा है. आर्थिक और पारिवारिक मोर्चे पर चोट खाया हुआ व्यक्ति जो कुछ कहता है उसमें उसका अपना गहरा अनुभव होता है. वैसे भी हम भारतवासी यह मानते हैं कि ज्ञान जहाँ से भी और जिससे भी मिले ले लेना चाहिए. इसलिए लियो की बातें अर्थ रखती हैं.
मैं लगभग 35 साल का हो गया हूँ और उतनी गलतियाँ कर चुका हूँ जितनी मुझे अब तक कर लेनी चाहिए थीं। पछतावे में मेरा यकीन नहीं है… और अपनी हर गलती से मैंने बड़ी सीख ली है… और मेरी ज़िंदगी बहुत बेहतर है।
लेकिन मुझे यह लगता है कि ऐसी बहुत सारी बातें हैं जो मैं यदि उस समय जानता जब मैं युवावस्था में कदम रख रहा था तो मेरी ज़िंदगी कुछ और होती।
वाकई? मैं यकीन से कुछ नहीं कह सकता। मैं क़र्ज़ के पहाड़ के नीचे नहीं दबा होता लेकिन इसके बिना मुझे इससे बाहर निकलने के रास्ते की जानकारी भी न हुई होती। मैंने बेहतर कैरियर अपनाया होता लेकिन मुझे वह अनुभव नहीं मिला होता जिसने मुझे ब्लौगर और लेखक बनाया।
मैंने शादी नहीं की होती, ताकि मेरा तलाक भी न होता… लेकिन यह न होता तो मुझे पहली शादी से हुए दो प्यारे-प्यारे बच्चे भी नहीं मिले होते।
मुझे नहीं लगता कि मैं अपने साथ हुई ये सारी चीज़ें बदल सकता था। पीछे मुड़कर देखता हूँ तो पाता हूँ कि मैंने ऐसे सबक सीखे हैं जो मैं ख़ुद को तब बताना चाहता जब मैं 18 साल का था। क्या अब वो सबक दुहराकर मैं थोड़ा सा पछता लूँ? नहीं। मैं उन्हें यहाँ इसलिए बाँट रहा हूँ ताकि हाल ही में अपना होश संभालनेवाले युवा लड़के और लड़कियां मेरी गलतियों से कुछ सबक ले सकें।
ये मेरी गलतियों की कोई परिपूर्ण सूची नहीं है लेकिन मैं यह उम्मीद करता हूँ कि कुछ लोगों को इससे ज़रूर थोड़ी मदद मिलेगी।
1. खर्च करने पर नियंत्रण - यूँ ही पैसा उड़ा देने की आदत ने मुझे बड़े आर्थिक संकट में डाला। मैं ऐसे कपड़े खरीदता था जिनकी मुझे ज़रूरत नहीं थी। ऐसे गैजेट खरीद लेता था जिन्हें सिर्फ़ अपने पास रखना चाहता था। ऑनलाइन खरीददारी करता था क्योंकि ये बहुत आसान है। अपनी बड़ी स्पोर्ट्स यूटिलिटी वेहिकल मैंने सिर्फ़ औरतों को आकर्षित और प्रभावित करने के चक्कर में खरीद ली। मुझे अब ऐसे किसी भी चीज़ पर गर्व नहीं होता। मैंने आदतन पैसा खर्च करने के स्वभाव पर काबू पा लिया है। अब कुछ भी खरीदने से पहले मैं थोड़ा समय लगाता हूँ। मैं यह देखता हूँ कि क्या मेरे पास उसे खरीदने के लिए पैसे हैं, या मुझे उसकी वाकई ज़रूरत है या नहीं। 15 साल पहले मुझे इसका बहुत लाभ मिला होता।
2. सक्रिय-गतिमान जीवन – जब मैं हाईस्कूल में था तब भागदौड़ और बास्केटबाल में भाग लेता था। कॉलेज पहुँचने के बाद मेरा खेलकूद धीरे-धीरे कम होने लगा। यूँ तो मैं चलते-फिरते बास्केटबाल हाईस्कूल के बाद भी खेलता रहा पर वह भी एक दिन बंद हो गया और ज़िंदगी से सारी गतिशीलता चली गयी। बच्चों के साथ बहार खेलने में ही मेरी साँस फूलने लगी। मैं मोटा होने लगा। अब मैंने बहुत दौड़भाग शुरू कर दी है पर बैठे-बैठे सालों में जमा की हुई चर्बी को हटाने में थोड़ा वक़्त लगेगा।
3. आर्थिक नियोजन करना – मैं हमेशा से यह जानता था कि हमें अपने बजट और खर्चों पर नियंत्रण रखना चाहिए। इसके बावजूद मैंने इस मामले में हमेशा आलस किया। मुझे यह ठीक से पता भी नहीं था कि इसे कैसे करते हैं। अब मैंने इसे सीख लिया है और इसपर कायम रहता हूँ। हां, कभी-कभी मैं रास्ते से थोड़ा भटक भी जाता हूँ पर दोबारा रास्ते पर आना भी मैंने सीख लिया है। ये सब आप किसी किताब से पढ़कर नहीं सीख सकते। इसे व्यवहार से ही जाना जा सकता है। अब मैं यह उम्मीद करता हूँ कि अपने बच्चों को मैं यह सब सिखा पाऊँगा।
4. जंकफ़ूड पेट पर भारी पड़ेगा – सिर्फ़ ठहरी हुई लाइफस्टाइल के कारण ही मैं मोटा नहीं हुआ। बाहर के तले हुए भोजन ने भी इसमें काफी योगदान दिया। हर कभी मैं बाहर पिज्जा, बर्गर, और इसी तरह की दूसरी चर्बीदार तली हुई चीज़ें खा लिया करता था। मैंने यह कभी नहीं सोचा कि इन चीज़ों से कोई समस्या हो सकती है। अपने स्वास्थ्य के बारे में तो हम तभी सोचना शुरू करते हैं जब हम कुछ प्रौढ़ होने लगते हैं। एक समय मेरी जींस बहुत टाइट होने लगी और कमर का नाप कई इंच बढ़ गया। उस दौरान पेट पर चढी चर्बी अभी भी पूरी तरह से नहीं निकली है। काश किसी ने मुझे उस समय ‘आज’ की तस्वीर दिखाई होती जब मैं जवाँ था और एक साँस में सोडे की बोतल ख़त्म कर दिया करता था।
5. धूम्रपान सिर्फ़ बेवकूफी है – धूम्रपान की शुरुआत मैंने कुछ बड़े होने के बाद ही की। क्यों की, यह बताना ज़रूरी नहीं है लेकिन मुझे हमेशा यह लगता था कि मैं इसे जब चाहे तब छोड़ सकता हूँ। ऐसा मुझे कई सालों तक लगता रहा जब एक दिन मैंने छोड़ने की कोशिश की लेकिन छोड़ नहीं पाया। पाँच असफल कोशिशों के बाद मुझे यह लगने लगा कि मेरी लत वाकई बहुत ताकतवर थी। आखिरकार 18 नवम्बर 2005 को मैंने धूम्रपान करना पूरी तरह बंद कर दिया लेकिन इसने मेरा कितना कुछ मुझसे छीन लिया।
6. रिटायरमेंट की तैयारी – यह बात और इससे पहले बताई गयी बातें बहुत आम प्रतीत होती हैं। आप यह न सोचें कि मुझे इस बात का पता उस समय नहीं था जब मैं 18 साल का था। मैं इसे बखूबी जानता था लेकिन मैंने इसके बारे में कभी नहीं सोचा। जब तक मैं 30 की उम्र पार नहीं कर गया तब तक मैंने रिटायर्मेंट प्लानिंग के बारे में कोई चिंता नहीं की। अब मेरा मन करता है कि उस 18 वर्षीय लियो को इस बात के लिए एक चांटा जड़ दिया जाए। खैर। अब तक तो मैं काफी पैसा जमा कर चुका होता! मैंने भी रिटायर्मेंट प्लान बनाया था लेकिन मैंने तीन बार जॉब्स बदले और अपना जमा किया पैसा यूँही उड़ा दिया।
7. जो कुछ भी आपको कठिन लगता है वह आपके काम का होता है – यह ऐसी बात है जो ज्यादा काम की नहीं लगती। एक समय था जब मुझे काम मुश्किल लगता था। मैंने काम किया ज़रूर, लेकिन बेमन किया। अगर काम न करने की छूट होती तो मैं नहीं करता। परिश्रम ने मुझे बहुत तनाव में डाला। मैं कभी भी परिश्रम नहीं करना चाहता था। लेकिन मुझे मिलने वाला सबक यह है कि जितना भी परिश्रम मैंने अनजाने में किया उसने मुझे सदैव दूर तक लाभ पहुँचाया। आज भी मैं उन तनाव के दिनों में कठोर परिश्रम करते समय सीखे हुए हुनर और आदतों की कमाई खा रहा हूँ। उनके कारण मैं आज वह बन पाया हूँ जो मैं आज हूँ। इसके लिए मैं युवक लियो का हमेशा अहसानमंद रहूँगा।
8. बिना जांचे-परखे कोई पुराना सामान नहीं खरीदें – मैंने एक पुरानी वैन खरीदी थी। मुझे यह लग रहा था की मैं बहुत स्मार्ट था और मैंने उसे ठीक से जांचा-परखा नहीं। उस खटारा वैन के इंजन में अपार समस्याएँ थीं। उसका एक दरवाजा तो चलते समय ही गिर गया। खींचते समय दरवाजे का हैंडल टूट गया। कांच भी कहीं टपक गया। टायर बिगड़ते गए, खिड़कियाँ जाम पडी थीं, और एक दिन रेडियेटर भी फट गया। अभी भी मैं ढेरों समस्याएँ गिना सकता हूँ। वह मेरे द्वारा ख़रीदी गयी सबसे घटिया चीज़ थी। यह तो मैं अभी भी मानता हूँ की पुरानी चीज़ों को खरीदने में समझदारी है लेकिन उन्हें देख-परख के ही खरीदना चाहिए।
9. बेचने से पहले ही सारी बातें तय कर लेने में ही भलाई है – अपने दोस्त के दोस्त को मैंने अपनी एक कार बेची। मुझे यकीन था कि बगैर लिखा-पढी के ही वह मुझे मेरी माँगी हुई उचित कीमत अदा कर देगा। यह मेरी बेवकूफी थी। अभी भी मुझे वह आदमी कभी-कभी सड़क पर दिख जाता है लेकिन अब मुझमें इतनी ताक़त नहीं है कि मैं अपना पैसा निकलवाने के लिए उसका पीछा करूँ।
10. कितनी भी व्यस्तता क्यों न हो, अपना शौक पूरा करो – मैं हमेशा से ही लेखक बनना चाहता था। मैं चाहता था कि एक दिन लोग मेरी लिखी किताबें पढ़ें लेकिन मेरे पास लिखने का समय ही नहीं था। पूर्ण-कालिक नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियां होने के कारण मुझे लिखने का वक़्त नहीं मिल पाता था। अब मैं यह जान गया हूँ कि वक़्त तो निकालना पड़ता है। दूसरी चीज़ों से ख़ुद को थोड़ा सा काटकर इतना समय तो निकला ही जा सकता है जिसमें हम वो कर सकें जो हमारा दिल करना चाहता है। मैंने अपनी ख्वाहिश के आड़े में बहुत सी चीज़ों को आने दिया। यह बात मैंने 15 साल पहले जान ली होती तो आजतक मैं 15 किताबें लिख चुका होता। सारी किताबें तो शानदार नहीं होतीं लेकिन कुछेक तो होतीं!
11. जिसकी खातिर इतना तनाव उठा रहे हैं वो बात हमेशा नहीं रहेगी – जब हमारा बुरा वक़्त चल रहा होता है तब हमें पूरी दुनिया बुरी लगती है। मुझे समयसीमा में काम करने होते थे, कई प्रोजेक्ट एक साथ चल रहे थे, लोग मेरे सर पर सवार रहते थे और मेरे तनाव का स्तर खतरे के निशान के पार जा चुका था। मुझे मेहनत करने का कोई पछतावा नहीं है (जैसा मैंने ऊपर कहा) लेकिन यदि मुझे इस बात का पता होता कि इतनी जद्दोजहद और माथापच्ची 15 साल तो क्या अगले 5 साल बाद बेमानी हो जायेगी तो मैं अपने को उसमें नहीं खपाता। परिप्रेक्ष्य हमें बहुत कुछ सिखा देता है।
12. काम के दौरान बनने वाले दोस्त काम से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं – मैंने कई जगहों में काम किया और बहुत सारी चीज़ें खरीदीं और इसी प्रक्रिया में बहुत सारे दोस्त भी बनाये। काश मैं यहाँ-वहां की बातों में समय लगाने के बजाय अपने दोस्तों और परिजनों के साथ बेहतर वक़्त गुज़र पाता!
13. टीवी देखना समय की बहुत बड़ी बर्बादी है – मुझे लगता है कि साल भर में हम कई महीने टी वी देख चुके होते हैं। रियालिटी टी वी देखने में क्या तुक है जब रियालिटी हाथ से फिसली जा रही हो? खोया हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता – इसे टी वी देखने में बरबाद न करें।
14. बच्चे समय से पहले बड़े हो जायेंगे। समय नष्ट न करें – बच्चे देखते-देखते बड़े हो जाते हैं। मेरी बड़ी बेटी क्लो कुछ ही दिनों में 15 साल की हो जायेगी। तीन साल बाद वह वयस्क हो जायेगी और फ़िर मुझसे दूर चली जायेगी। तीन साल! ऐसा लगता है कि यह वक़्त तो पलक झपकते गुज़र जाएगा। मेरा मन करता हूँ कि 15 साल पहले जाकर ख़ुद को झिड़क दूँ – दफ्तर में रात-दिन लगे रहना छोडो! टी वी देखना छोडो! अपने बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा समय व्यतीत करो! – पिछले 15 साल कितनी तेजी से गुज़र गए, पता ही न चला।
15. दुनिया के दर्द बिसराकर अपनी खुशी पर ध्यान दो – मेरे काम में और निजी ज़िंदगी में मेरे साथ ऐसा कई बार हुआ जब मुझे लगने लगा कि मेरी दुनिया बस ख़त्म हो गयी। जब समस्याएँ सर पे सवार हो जाती थीं तो अच्छा खासा तमाशा बन जाता था। इस सबके कारण मैं कई बार अवसाद का शिकार हुआ। वह बहुत बुरा वक़्त था। सच तो यह था कि हर समस्या मेरे भीतर थी और मैं सकारात्मक दृष्टिकोण रखकर खुश रह सकता था। मैं यह सोचकर खुश हो सकता था कि मेरे पास कितना कुछ है जो औरों के पास नहीं है। अपने सारे दुःख-दर्द मैं ताक पर रख सकता था।
16. ब्लॉग्स केवल निजी पसंद-नापसंद का रोजनामचा नहीं हैं – पहली बार मैंने ब्लॉग्स 7-8 साल पहले पढ़े। पहली नज़र में मुझे उनमें कुछ ख़ास रूचि का नहीं लगा – बस कुछ लोगों के निजी विचार और उनकी पसंद-नापसंद! उनको पढ़के मुझे भला क्या मिलता!? मुझे अपनी बातों को दुनिया के साथ बांटकर क्या मिलेगा? मैं इन्टरनेट पर बहुत समय बिताता था और एक वेबसाईट से दूसरी वेबसाईट पर जाता रहता था लेकिन ब्लॉग्स से हमेशा कन्नी काट जाता था। पिछले 3-4 सालों के भीतर ही मुझे लगने लगा कि ब्लॉग्स बेहतर पढने-लिखने और लोगों तक अपनी बात पहुंचाने और जानकारी बांटने का बेहतरीन माध्यम हैं। 7-8 साल पहले ही यदि मैंने ब्लॉगिंग शुरू कर दी होती तो अब तक मैं काफी लाभ उठा चुका होता।
17. याददाश्त बहुत धोखा देती है – मेरी याददाश्त बहुत कमज़ोर है। मैं न सिर्फ़ हाल की बल्कि पुरानी बातें भी भूल जाता हूँ। अपने बच्चों से जुडी बहुत सारी बातें मुझे याद नहीं हैं क्योंकि मैंने उन्हें कहीं लिखकर नहीं रखा। मुझे ख़ुद से जुडी बहुत सारी बातें याद नहीं रहतीं। ऐसा लगता है जैसे स्मृतिपटल पर एक गहरी धुंध सी छाई हुई है। यदि मैंने ज़रूरी बातों को नोट कर लेने की आदत डाली होती तो मुझे इसका बहुत लाभ मिलता।
18. शराब बुरी चीज़ है – मैं इसके विस्तार में नहीं जाऊँगा। बस इतना कहना ही काफी होगा कि मुझे कई बुरे अनुभव हुए हैं। शराब और ऐसी ही कई दूसरी चीज़ों ने मुझे बस एक बात का ज्ञान करवाया है – शराब सिर्फ़ शैतान के काम की चीज़ है।
19. आप मैराथन दौड़ने का निश्चय कभी भी कर सकते हैं – इसे अपना लक्ष्य बना लीजिये – यह बहुत बड़ा पारितोषक है। स्कूल के समय से ही मैं मैराथन दौड़ना चाहता था। यह एक बहुत बड़ा सपना था जिसे साकार करने में मैंने सालों लगा दिए। मैराथन दौड़ने पर मुझे पता चला कि यह न सिर्फ़ सम्भव था बल्कि बहुत बड़ा पारितोषक भी था। काश मैंने दौड़ने की ट्रेनिंग उस समय शुरू कर दी होती जब मैं हल्का और तंदरुस्त था, मैं तब इसे काफी कम समय में पूरा कर लेता!
20. इतना पढने के बाद भी मेरी गलतियाँ दुहराएंगे तो पछतायेंगे – 18 वर्षीय लियो ने इस पोस्ट को पढ़के यही कहा होता – “अच्छी सलाह है।” और इसके बाद वह न चाहते हुए भी वही गलतियाँ दुहराता। मैं बुरा लड़का नहीं था लेकिन मैंने किसी की सलाह कभी नहीं मानी। मैं गलतियाँ करता गया और अपने मुताबिक ज़िंदगी जीता गया। मुझे इसका अफ़सोस नहीं है। मेरा हर अनुभव (शराब का भी) मुझे मेरी ज़िंदगी की उस राह पर ले आया है जिसपर आज मैं चल रहा हूँ। मुझे अपनी ज़िंदगी से प्यार है और मैं इसे किसी के भी साथ हरगिज नहीं बदलूँगा। दर्द, तनाव, तमाशा, मेहनत, परेशानियाँ, अवसाद, हैंगओवर, क़र्ज़, मोटापा – सलाह न मानने के इन नतीजों का पात्र था मैं।



इन २० बातो पे अमल करना आसान तो नहीं है पर फिर भी मैं पूरी कोशिस करूँगा की जितनी हो सके अपने जीवन में उतर लूँ .
धन्यवाद
आप मैराथन दौड़ने का निश्चय कभी भी कर सकते हैं
बाकी का पता नहीं लेकिन मैराथन तो हम २६ साल की बांकी उमर में ही दौड चुके हैं, अब तो बोस्टन मैराथन में क्वालिफ़ाई करने की तैयारी चल रही है।
इस उपयोगी पोस्ट को अनुदित करके उपलब्ध कराने हेतु आभार।
बहुत सुंदर लेखों का बहुत ही सुंदर अनुवाद और बेहतरीन जानकारी।
आभार…
जमाये रहिये जी। बढ़िया लगता है पढ़ना।
padkar unpar amal bhi kijiye ji……
sunder lekh,achhi jankari sahit,magar baki sab thik par tv dekhna kaise chode?vaise bhi hafte mein do ghante bhi mushkil se nikalte hai tv ke liye:(
बेहतरीन जानकारी। उत्साह भी बढता है।
बहुत उपयोगी पोस्ट … इन बातों पर सबको अमल करना चाहिए … धन्यवाद ।
बातें तो काम की हैं अब ज़रा अमल करने की शुरुआत की जाए…
बहुत अच्छा विश्लेषण लियो का , ये बातें वाकई ध्यान देने लायक बाते हैं
शानदार अनुवाद
आपके ब्लॉग पर आ कर अच्छा लगा…! ये जान कर और अच्छा लगा कि आप और मै हमपेशा है …मगर ये सोच कर बहुत बुरा भी लगा कि मैं आप की तरह अनुवाद का कोई काम नही कर पा रही हूँ ..!
Kepp it up….!
प्रेरक रचना
और रोचक प्रस्तुतिकरण .
बधाई
मैं भी ३५ साल का हूँ और मेरी सारी गलतियां आपके लियो को कैसे पता चलीं ।
aapki baaton se kafi prabhavit hua hu….mushkil hai par jarur aazmaunga.. thanks
bahoot accha lagaa
bahoot hi accha laga
काफ़ी देर से मिला एक उपयोगी पोस्ट! चलिये अब जो बचि खुचि ज़िंदगि है उसे ही सँवारा जाए.
प्रेरक रचना
और रोचक प्रस्तुतिकरण बहुत अच्छा विश्लेषण लियो का , ये बातें वाकई ध्यान देने लायक बाते हैं
bahut hi rechak aur jivan me us chij ko dharan karne wali katha hai. aur jisne bhi in chijon ko dharankar liya wo apne jivan me kabhi bhi dukhi nahi rahega.
good luck rage raho munna bhai.
अच्छी पोस्ट है। आदमी कितनी ही सावधानी रखे, कुछ न कुछ तो मलाल करने को उसके आस आखिरी में होगा ही। ऐसा भी कर सकता था न कर सका। वगैरह-वगैरह।
धन्यवाद इतनी अच्छी बाते बताने के लिए
Hello Sir, Lot of thenx for share this. I like blog. Its verry usefull for me sooooooooo Thank You Verry Much
RAJ KALAL
ap ka lekh bahut hi achha lga …saari buri aadte ek sath to nhi ja sakati magar fijulkharchi ki ek aadat aaj se hi bnd kr rha hu ….mobile recharge and …petrol…dono ko hi limited kr duga …..
I often visit your blog and really like it. Even this is the only blog i visit regularly. This time i thank you for this beautiful post and all.
Thank you for sharing these beautiful and very useful lessons of life.
God bless you.
यह लेख शायद मैँ पाँच साल पहले पढा होता तो मेरा जीवन भी काफी बेहतर होता।
It is very good for those people who want to guide for any situation
by reading various quotas and secret of the life.
thnx for these precious suggestions.
i will surely keep them in my mind.
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Hello Sir,
Thanks for such precious thoughts. They may be beneficial in real life if followed sincerely.
Hello Sir,
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mri jindagi me mai aapke batai bato ho uatarna chahata hun
as many thanks,
as there are stars………………………..
by vijender-9828010940
निशांत बाबू , मैं आप से इस समय पूरी दुगनी उम्र का हूँ !और आज मुझे यहाँ एहसास हो रहा है कि मेरी टिप्पणी यहाँ हो सकती है !उपर लिखी बातों मैं से दस तो मेरे जीवन में रही है !दो बातों का मेरे से कोई सरोकार नही !१.टी.वी. और दूसरा जंक फ़ूड . सिगरेट का मैं आदी था जिसे मैंने २२ साल पीने के बाद २३ फरवरी १९८२ को छोड दिया और अपनी इच्छाशक्ति के बल पर आज तक कायम हूँ | आज कल उपदेश देना मना है ,और न कोई सुनता है |पर मैं ये जरूर कहूँगा कि इसके बावजूद और कोई इल्लत न हो कर भी मैं दिल का मरीज हूँ ,हाई ब्लड प्रेशर भी है ,सिर्फ अपनी भावुकता और अपनी खुद की जिन्दगी की मिली परस्थितियों से !
बस यही केहना चाहूँगा की आज कल की पीड़ी अगर इन बातों को अपना ले तो ,यकीनन उनका भविष्य सुखमय और सेहतमंद होगा |
आप सब को मेरा आशीर्वाद!
खुश और सेहतमंद जीवन जियें !
अशोक सलूजा !
इन २० बातो पे अमल करना आसान तो नहीं है पर फिर भी मैं पूरी कोशिस करूँगा की जितनी हो सके अपने जीवन में उतर लूँ .
धन्यवाद : mob no 8750123502
dear
im 31 yrs but doing all thngs.
really its a nice article!
this is realy usful for those people who’s unknwon about english
thanks a lot!
Bahut bariya g, Great information, Thanks for sharing, Nishant G.
JEEVAN ME ANUBAV HONA HI JEEVAN KO SARTHAK BANATA HEI
Nishant ji main 35 saal ka hoon, mujhe khushi hai jo aapne 20 buri aadtein batai usme se adhiktar mujhe nahin lagi, phir bhi jo bachi hai unhe sudharne ki puri koshish karunga. Main bahut hi bhavuk kism ka insaan hoon aur yehi bhavukta mujhe lagta hai mujhe nuksan kar rahi hai, chhoti chhoti baaton ko dil se laga baithta hoon, chhoti si pareshani bahut adhik tanav kar deti hai, sakaratamak vichardhara ki kami hai. Main vaada karta hoon ki in sabhi kamiyon ko door karne ki poori koshish karunga.
***** sir u…r…great *****
playing to win requires commitment
उपरोक्त में से में भी १/३ गलतिया कर चूका हु [३,८,९,११,१४,१५,१७,]४७ वर्ष की उम्र में भी गर्व कर सकता हु की २/३ गलतिया मेने नही की है !
mai in bato ko grahan karne ki kausish karunga
kash yee bees baten mujhe bhi malum hoti to main bhi kuch badhiyaa hota , satya hai, es vichardhara per koi tippdi awasyak nahi hai , satya kaa saamnaa to ek din sabhi ko kerna hai, aadmi seb jagah sey bhag sekta hai per apne aap sey kabhi nahi bhag sekta uska ietehass usko kabhi nahi bhulne deta ki usne kyaa kiya kyaa nahi jeevan ishwer ki den hai aur wo bhi manav ke roop mey bhagwan ki rachna utni hi sunder hai jitna weh teb manav jeevan kaa sedupyog hi ek accha kaam hai
बहुत ही अच्छा लेख है.दूसर शब्दों में कहे तो इंसान के लिए आईने की तरह है….
nice thouts i hope i wiil emply my life.
आप ने जो लिखा खुब लिखा जितनी तारीफ कि जाए कम है
Bahut acchi soch hai. Lekin hamare saath aisa kyon hota hai sab kuch ho jane ke baad
hamain khayal aata hai ke hamain ye nahi karna chahiye tha. Hum ek example banke
kyon rah jate hai. ke humne ye kiya tum ye na karna. Ye to swabhavik hai raste ka pathar dekh lene ke baad bhi koi use thokar marta hai to koi thokar khata hai.
isliye hamare saath jo bhi hua uske jimmedar hum khud hote directly ya indirectly
Behtar ye hahi hai jo aapne socha dushro ko sahi disha dikhane ke liye khud example
ban jana aur ye sochna ke koi to hamare example se sambhle ga.
Thanks
bhagvan ki dusri tasvir insan he
aacha laga par kar