मुल्ला नसीरुद्दीन ने एक दिन अपने शिष्यों से कहा – “मैं अंधेरे में भी देख सकता हूँ”।
एक विद्यार्थी ने कौतूहलवश उससे पूछा – “ऐसा है तो आप रात में लालटेन लेकर क्यों चलते हैं?”
“ओह, वो तो इसलिए कि दूसरे लोग मुझसे टकरा न जायें” – मुल्ला ने मुस्कुराते हुए कहा।

सही है।
होली की शुभकामनाएँ !
घुघूती बासूती
बढ़िया!
आपको होली की मुबारकबाद एवं बहुत शुभकामनाऐं.
सादर
समीर लाल
मुल्ला नसरुद्दीन मेरा भी प्रिय पात्र है. बहुत ही सुंदर
mulla ki aur bhi gathayen lekar aao ,shriman g
hi mulla ji
aap ku chalay gay
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