एक दिन सम्राट अकबर ने दरबार में अपने मंत्रियों से पूछा कि मनुष्य में काम-वासना कब तक रहती है। कुछ ने कहा ३० वर्ष तक, कुछ ने कहा ६० वर्ष तक। बीरबल ने उत्तर दिया – “मरते दम तक”।
अकबर को इस पर यकीन नहीं आया। वह बीरबल से बोला – मैं इसे नहीं मानता। तुम्हें यह सिद्ध करना होगा की इंसान में काम-वासना मरते दम तक रहती है”।
बीरबल ने अकबर से कहा कि वे समय आने पर अपनी बात को सही साबित करके दिखा देंगे।
एक दिन बीरबल सम्राट के पास भागे-भागे आए और कहा – “आप इसी वक़्त राजकुमारी को साथ लेकर मेरे साथ चलें”।
अकबर जानते थे कि बीरबल की हर बात में कुछ प्रयोजन रहता था। वे उसी समय अपनी बेहद खूबसूरत युवा राजकुमारी को अपने साथ लेकर बीरबल के पीछे चल दिए।
बीरबल उन दोनों को एक व्यक्ति के घर ले गया। वह व्यक्ति बहुत बीमार था और बिल्कुल मरने ही वाला था।
बीरबल ने सम्राट से कहा – “आप इस व्यक्ति के पास खड़े हो जायें और इसके चेहरे को गौर से देखते रहें”।
इसके बाद बीरबल ने राजकुमारी को कमरे में बुलाया। मरणासन्न व्यक्ति ने राजकुमारी को इस दृष्टि से देखा कि अकबर के समझ में सब कुछ आ गया।
बाद में अकबर ने बीरबल से कहा – “तुम सही कहते थे। मरते-मरते भी एक सुंदर जवान लडकी के चेहरे की एक झलक आदमी के भीतर हलचल मचा देती है”।

आपका चिटठा भीड में दूर से ही दिखाई देता है। बधाई।
sahi baat he.lekin swasth sarir me hi swasth man niwas karta he.
आप ने सही कहा। जब तक शरीर है तब तक वासना रहेगी ही।
Kya tumme bhi vasna h ye puchna h
वाकई अच्छा ब्लाग है। अलग और एक ख़ास अंदाज का। और भी बेहतरीन और विश्व की चुनिंदा कहानियां पढ़ने को दिल कर रहा है।
कहानी अच्छी है परन्तु सचमुच ऐसा होता है इसमें संदेह है…
प्रवीण जी, आपका कहना बहुत हद तक सही है. कहानी तो कहानी है. ऐसा हुआ ही हो इसमें भी शक है. किसी सोचविचार करनेवाले ने कभी दो बातों को मिला दिया और कथा बन गई.
कहीं प्रवीण जी अनुभव कर के तो नहीं देखना चाहते.
Akbar aur Birbal ki kathayen jivan ke satyo ko saral shabdo me samjhane ke liye hi hain aur isme koi shak nahi ki koi bhi wasna marte dam tak rahati hai.
अच्छा है।
jise itminan na ho vo apne andar rahane wale se pooche – sahi jawab mil jayega
ekdam sahi bat hai
good
TO KYA ‘VASNA’ YA ‘KAM’ ko HEEN DRISHTI SE DEKHA JANA CHAHIYE? KYA ISKA BHI UTNA HI SAMMAN NAHI HONA CHAHIYE JITNA ROTI KA KIYA JATA HAI? KYA ISEY GALIYON MEIN JODNA CHAHIYE JAISA KI HUM LOG HAR ROZ KARTEY HAIN? YE EVE TEESE KYON HOTI HAI HAMAREY YAHAN? KYONKI KAM KE PRATI HAMARI DRISHTI BALPAN SE HI VIKRIT KAR DE JATI HAI.
MERI DRISHTI MEIN YEH AAJ KA SABSEY JALTA HUA PRASHAN HAI. YEH SAMAJIK PRASHAN NAHIN HAI.. JEEVAN SE JUDA PRASHAN HAI. LEKIN HUM TO PREM KARNEY WALON KO FANSI PAR LATKA RAHEY HAIN. HINSA KE PUJARION KE DIN RAT GUN GA RAHEY HAI. BAT KUCHH AUR KHOLNEY KE LIYE MAFI . HINSA AUR KAM JEEVAN KI MOOL PRVRITIYAN HAIN. HINSAMUKT KAM PREM KA PRTHAM SOPAN HAI. JISNEY PREM NAHIN KIYA VEH JIA HI NAHIN…PARMATMA TO BADI DOOR KI BAT HAI.
AUR ANT MEIN
KAFIR NAHIN KATIL NAHIN SHAITAN NAHI HOON MAIN
ALLAH TERI RAHMAT TALIBAN NAHI HOON MAIN
Vakai tarif ke kaabil hai aap ka blog…..koi prarna le ya nahi lekin “Aisa hai kya” mujhe zarur mili
Best collection
कहानी सच हो या कल्पित, कहानी में कही गयी बात सही है।
This a unique collection
this is very good yaar ,
mai iss blog ki fan ho gayi . roj ek bar padhane ke bad hi dusare kamo me man lagata hai . thankyou so much.
this site is very useful all people . thanks
mein bhi apki trh bhut impress ho isse
veary good i like it
सन्देश ठीक है मगर पात्रों का चयन ठीक नहीं …..
पढ़कर हमारे अन्दर भी नाना पाटेकरत्व जाग उठा – “अच्छा है। बहुत अच्छा है”
एकदम शुक्ल जी की तर्ज पर।
This is fully truth that a man wants every time to **** any queet live or dead.
आप ने जो कहानी चुन कर लिखी है वो बात काफी हद तक सही है पर ये सब हमारी मनन स्थिति पर निर्भर कतरता है न की उम्र और अवस्था पर वैसे आपका लेखें वास्तव मैं सही राह पर अगर्सेर है और आशा है की आपका लेखेन इसी तेरहं पढने को मिलता रहेगा धन्यवाद !!
it is very good ant true. thanks.
वासना एक प्रवृत्ति है,जो शारीरिक नहीं मानसिक होती है …और जबतक मन जीवित है, प्रवृत्ति विशेष पोषित है, इसका आस्तित्व रहेगा ही…
बहुत ही रोचक कथा…
इन छोटी छोटी रोचक कथाओं के माध्यम से आप बड़े सुन्दर सन्देश दे दिया करते हैं…
लोकहित के इस महत पुनीत प्रयास के लिए आपका साधुवाद ….
बहुत सुंदर ,क्या बात है .कहा भी कहा जाता है ना दिल जवान तो आदमी जवान .रचना जी ने बहुत उपयुक्त कमेन्ट की है नक़ल करता हूँ- वासना एक प्रवृत्ति है,जो शारीरिक नहीं मानसिक होती है .हमारे ही देश में अभी कुछ दिन पहले ८० वर्ष के आदमी के बेटा हुआ है और उसको पत्नी की लगातार अवश्यकता रहती है ,यह उसका कहना है . जबकि यह भी होता है काम की इच्छा होने के बावजूद परिस्थितियों के चलते विमुख होना पड़ता है .बहरहाल यह सच है वासना मरते दम तक रहती है .
this is a nice story i like it, it shows that everyone wants it.
bilkul sahi hai ye hota hi hoga.
like it…
very nice blog & soooooooooooooooooooooooo intrested KAHANI
VASNA ANDHI HOTI HE BUT ETNI BUDDI BHI HOTI HE AAJ SUNA..THANKS
sahi ha vasna ki koi umar nahi hati
This is very blunder mistake by God
कहानी में यह पूछा गया है कि आदमी के जिस्म में वासना कब तक जन्म ले सकती है या पल सकती है, ना कि वासना की उम्र।
वासना की उम्र तो पल पहर ही होती है। और जिस्म की भूख ही वासना नहीं होती, कोई भी भूख वासना है – शक्ित सत्ता की हवस, महत्वाकांक्षा की हवस, सर्वोच्चता हासिल करने, सम्पूर्णता हासिल करने की हवस…. यहां तक की सर्वोच्च आध्यात्मिक अनुभूतियों की हवस। पर इनकी उम्र पल पहर ही होती है, जैसे ही पूरी होती है, ये चेहरा बदल लेती है।
bhut khub ………….dhanyawad……. me aapse purnru se sahamat hoon…………..
wasna kya hai .Ple – tell me .
absolutely true
wah wah!kya baat!ekdum ‘to the point’!
iska mtlab insaan ki vikratiye ose aant tak ni chodti…..
pahle to individual ye decide kre ki vo in bhavnao ko kitna positive ya negative leta h.aur kitna lena chahiye.tabhi samadhan ki or barha ja skta h
रोचक कहानी
मिस्र्र देश कि रानी कयोपोट्रिवा कि याद आ गई जिसने मरने से पहले अपनी वासना शाँन्त कि थी (35 AD)
vasna eak durgandh hai……..jhan wasna hai wahan sugndh ho hi nhi sakti………….
bahut payara
jivan ki jijivisa me v basna he.
very nice
Achhi kahani dhundi hai lekin prattyek vyakti ki ikshayen ek jaisi nahi hoti chahe
wo budha ho chahe jawan.
आपके द़वारा वासना के कहानी से हमे एक अच्छी सीख मिलती रहेगी,जिस तरह एक व़दध व्यक्ति को वासन जीवन के अंतिम समय तक नही छोड्ता यह बात सत्य ही तो है …..
सब इस जीवन का ही हिस्सा है |
mansik tor per jo apne ko napusank samjhkar bare bare nim hakim ,baba & tantarik k chakkar mai par jate or khud ko namard samjhkar apni mansik dasa ko kharab kar lete hai or vasna k es mno rog mai per jate hai ese read karne per ehasas hoga ki vasna kabhi khatm hone wali chiz nahi hai…………………