सपना

एक पुरानी कहानी में एक औरत को हर रात यह सपना आता है कि एक बड़े भुतहे से मकान में एक दैत्य उसका पीछा कर रहा है। रात-दर-रात यही सपना उसे डराता रहता है। सपने में उसे लगता है कि दैत्य के नुकीले पंजे उसे अगले ही पल अपनी गिरफ्त में ले लेंगे और…

यह सब उसे बहुत वास्तविक लगता है।

और फ़िर एक रात वही सपना फ़िर से आता है। इस बार दैत्य बेचारी औरत को घेर लेता है। वह अब ऐसे कोने में फंस गई है कि वहां से बाहर बच निकलने का कोई रास्ता नहीं है। मौत सामने देखकर औरत दैत्य से पूछने का साहस कर बैठती है:

“तुम कौन हो!? मेरा पीछा क्यों करते हो? क्या तुम मुझे मार डालोगे?”

यह सुनकर दैत्य रुक गया। उसके भयानक चेहरे पर विस्मय के भाव उभर आए। अपनी कमर पर दोनों हाथ रखकर वह मासूमियत से बोला – “यह मैं कैसे बता सकता हूँ!? ये तो तुम्हारा सपना है!”

2 Comments

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2 Responses to सपना

  1. Jagdish Jindal

    hahahaha achhi hai..

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