धनिक का निमंत्रण : A Rich Patron’s Invite

kimonoएक धनिक ने ज़ेन-गुरु इक्क्यु को भोजन पर आमंत्रित किया। इक्क्यु अपने भिक्षुक वस्त्रों में उसके घर गए पर धनिक उन्हें पहचान न सका और उसने उनको भगा दिया।

इक्क्यु वापस अपने निवास पर आए और इस बार एक सुंदर, महंगा, अलंकृत चोगा पहन कर धनिक के घर गए। धनिक ने उनको बड़े आदरभाव से भीतर लिवाया और भोजन के लिए बैठने को कहा।

इक्क्यु ने भोजन करने के लिए बिछे आसन पर अपना चोगा उतार कर रख दिया और धनिक से बोले – “चूंकि आपने मेरे चोगे को खाने पर बुलाया है अतः इसे पहले भोजन कराइए।”

(A Zen story/anecdote about Master Ikkyu – in Hindi)

(~_~)

Wealthy patrons invited Ikkyu to a banquet.

Ikkyu arrived dressed in his beggar’s robes. The host, not recognizing hin, chased him away.

Ikkyu went home, changed into his ceremonial robe of purple brocade, and returned.

With great respect, he was received into the banquet room. There, he put his robe on the cushion, saying, “I expect you invited the robe since you showed me away a little while ago,” and left.

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